राहुल गांधी का लोकतंत्रArticles

राहुल गांधी का लोकतंत्र

थोड़ा अटपटा लग सकता है। राहुल का लोकतंत्र क्यों होना चाहिए? लोकतंत्र तो देश का होना चाहिए। देश का ही…

विष पाई न बनेArticles

विष पाई न बने

बात जनता पार्टी के शासन के बाद की है। मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री की कुर्सी से हट चुके थे। अलवर के…

गायब होते धरती पुत्रArticles

गायब होते धरती पुत्र

कभी सियासत में किसान नेता कहा जाना किसी भी राजनेता का बड़ा सपना होता था। यही नहीं, ‘किसान का बेटा‘,…

रामनाम की सवारी आसान, पर उतरायी कठिनArticles

रामनाम की सवारी आसान, पर उतरायी कठिन

अयोध्या एक बार फिर अपना इतिहास दोहरा रही है। एक बार फिर 90 के दशक और 1992 की यादें ताजा…

बिल गेट्स का नया बाजारArticles

बिल गेट्स का नया बाजार

कभी सॉफ्टवेयर इंडस्ट्रीज के बेताज बादशाह रहे बिल गेट्स इन दिनों अपने लिए एक नए बाजार की तलाश में हैं।…

माथे की बिंदी हिंदीArticles

माथे की बिंदी हिंदी

पिछले दिन हिंदी के लिए बेहद शुभ दिन थे। बीते दिनों में हिंदी को दो बड़े उपहार मिले। पहला, संयुक्त…

मन में दीप जलाएंArticles

मन में दीप जलाएं

  मनुष्य की मूल प्रवृत्ति है उत्सव प्रियता। क्योंकि उत्सव हमारे यहां आह्लाद, प्रसन्नता और उमंग लेकर आते हैं। दीपावली…

साख बनी राखArticles

साख बनी राख

कश्मीर से कन्याकुमारी तक किसी भी नाइंसाफी में इंसाफ की उम्मीद में भरोसे का नाम रही सीबीआई में दीपावली से…

रामजी करेंगे बेड़ा पारArticles

रामजी करेंगे बेड़ा पार

  भारतीय जनता पार्टी का कभी यह लोकप्रिय नारा था-‘रामलला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे।‘ इसी नारे के कठघरे में…