जिन्ह मोहि मारा ते मैं मारे

जिन्ह मोहि मारा ते मैं मारे
मां सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान ने अपनी शक्ति दिखाने के लिए अशोक वाटिका और कई जगहों पर अपने आक्रोश का तांडव किया। अनेक राक्षसों समेत रावण के पुत्र अक्षय कुमार को मार डाला। तब रावण ने अपने शक्तिशाली पुत्र मेघनाद को हनुमान को बांधकर अपनी सभा में पेश करने का निर्देश दिया। मेघनाद ने जब हनुमान को बांध कर रावण की सभा में पेश किया, तब रावण ने भगवान श्रीराम के दूत हनुमान से उत्पात करने और अपने लोगों को मारने के बारे में पूछा। उस समय हनुमान ने यही कहा था कि जिन्होंने मुझे मारा, मैंने भी उन्हें ही मारा है। इसके बाद रामचरित मानस के रचयिता तुलसीदास यह कहने से बचते हैं कि जिन्होंने थोड़ा भी मारा, उन्हें हनुमान ने बहुत मारा। किसने ज्यादा, किसने कम मारा। किसने किसको, कितना मारा। कुछ यही दृश्य विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान के मामले में हुआ।
वैसे तो अभिनंदन क्रिया है। पर उनके माता पिता ने इस क्रिया को संज्ञा में तब्दील करते हुए अपने बेटे को यही नाम दिया। लेकिन 28 फरवरी, 2019 की रात अभिनंदन विशेषण में तब्दील हो गया। विशेष बन गया। शौर्य का पर्याय हो गया। एक नई इबारत रच दी। अभिनंदन की तीन पीढ़ियां सेना में रही हैं। उनके पिता सिम्हाकुट्टी वर्तमान, भारतीय वायुसेना में एयर मार्शल थे। उन्होंने कारगिल युद्ध में हिस्सा लिया था। वे वायुसेना के उन चुनिंदा पायलटों में रहे जिसे चार हजार फ्लाइंग आवर्स के साथ चालीस तरह के विमान उड़ाने का अनुभव है। 2001 में संसद पर आतंकी हमले के बाद शुरू किये गए, आपरेशन पराक्रम में वेस्टर्न सेक्टर के एक एयरबेस का उन्होंने नेतृत्व किया।
जांबाज अभिनंदन सत्तर साल पुराना मिग 21 उड़ा रहे थे। यह सेना में टोही विमान के तौर पर इस्तेमाल होता है। लड़ाकू विमान की कैटेगरी में यह नहीं आता। लेकिन अभिनंदन ने मिग-21 से एफ-16 विमान को मार गिराया। यह ऐसे ही है जैसे कोई मारुति 800 से बीएमडब्ल्यू उड़ा दे। हालांकि यह मिग-21 अपग्रेडेड था और एफ-16 को मार गिराने के लिए मिग में लगी मिसाइल से अभिनंदन ने फायर किया। पर हमला करने के दौरान मिग भी टूट गया। भिम्बर जिले के होर्रान गांव के सरपंच मोहम्मद रज्जाक इस के चश्मदीद हैं। उनके मुताबिक जिले की नियंत्रण रेखा से सात किलोमीटर दूर आसमान में दो विमानों की उन्होंने लड़ाई देखी। जिसमें से एक नियंत्रण रेखा के पार चला गया, दूसरे में आग लग गई। मिग-21 के क्षतिग्रस्त होते ही अभिनंदन पैराशूट से नीचे कूद गये। वहां पर खड़ी जमात से जब अभिनंदन ने पूछा कि यह कौन सा इलाका है तक एक शरारती बच्चे ने कहा भारत, इस पर एफ-16 मार गिराने के शौर्य से लबरेज अभिनंदन ने वंदे मातर्म और भारत माता की जय की गूंज शुरू कर दी। पर थोड़ी ही देर में ही उन्हें लग गया कि वे पाकिस्तानी इलाके में हैं। उन्होंने आनन-फानन में अपने पास मौजूद दस्तावेज नष्ट किये। 60 घंटे पाकिस्तानियों की यातना सही।
अभिनंदन की शौर्य गाथाएं अलग-अलग जबानों से, अलग-अलग तरीकों से बयां की जाएंगी। लेकिन यह देखना बहुत अनिवार्य हो जाता है कि क्या पाकिस्तान इतना सुधर गया है कि वह हमारे एक ऐसे जांबाज साथी को बड़ी सरलता से भारत को सौंप दे। वह भी तब जबकि हमारे बहादुर अभिनंदन ने उनका एफ-16 विमान मार गिराया हो। यह विमान 18.8 मिलियन डाॅलर में आता है। 24 हजार डाॅलर हर घंटे इसकी उड़ान पर खर्च होते हैं।
पाकिस्तान की जेल में कैदी भारतीय नागरिक सरबजीत को इतना पीटते हैं कि जिन्ना अस्पताल में वह दमतोड़ देता है। जाधव के मामले में पाकिस्तान लगातार पैतरे बदल रहा है। ऐसे में यह तो साबित होता ही है कि पाकिस्तान के ऊपर अभिनंदन को छोड़ने का कोई बड़ा दबाव था। कोई बड़ी विवशता थी। इस मामले में भारत ने कूटनीतिक तौर पर सारे बड़े देशों को साथ ले लिया। पाकिस्तान का सरपरस्त चीन भी मुंह खोलने की स्थिति में नहीं था। हालांकि जिनेवा संधि भी अभिनंदन जैसे मामलों में वही करने की इजाजत देती है जो पाकिस्तान ने किया। लेकिन जाधव के मामले में वियेना संधि का पालन इसी पाकिस्तान ने नहीं किया है।
कभी पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक करके जिस पराक्रम का परिचय सेना ने दिया था। उससे बड़ी तैयारी हमारी सेना ने अभिनंदन को पाकिस्तान से मुक्त कराने के मामले में 60 घंटे के भीतर ही कर ली थी। मिराज 2000 तैयार कर लिये गए थे। इसे फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट बनाती है। पाक अधिकृत कश्मीर के बालकोट, मुजफ्फराबाद और चकोटी में जैश ए मोहम्मद के जो शिविर चल रहे थे, उन सबको जमींदोज कर दिया गया। इनका संचालन जैश के सरगना मसूद अजहर का रिश्तेदार मौलाना यूसुफ अजहर उर्फ उस्ताद गौरी कर रहा था। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक तो अजहर गुर्दे की बीमारी के कारण पाकिस्तान के रावलपिंडी के अस्पताल में भर्ती है, जबकि मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक पाक अधिकृत कश्मीर के जैश के शिविर जमींदोज होने में मसूद अजहर भी मारा गया है।
पाक अधिकृत कश्मीर के अलावा पाकिस्तान के केल, शारदी, दुधमियाल, अतमुकाम, जूरा, लीपा, पिसीबनछाम, फारवर्ड कठुआ, कतली, लजोते, निकिअले, खुराटा और गंधार में भी जैश के तेरह कैंप संचालित हो रहे हैं। अब भारत की नजर इन कैंपों पर है। पाकिस्तान गंभीर तौर से आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। जबकि भारत की अर्थ व्यवस्था इसके ठीक विपरीत कुलांचे मार रही है।
सभी देशों के पास सेना होती है। जल, थल और नभ तीनों सेना होती है। पर पाकिस्तान दुनिया का इकलौता ऐसा मुल्क है, जहां ठीक उलट स्थिति है। यहां सेना के पास देश है। पाकिस्तान को अल्लाह, आर्मी और आतंकवाद संचालित करते हैं। बीते रविवार को पाकिस्तान ने मसूद अजहर के मारे जाने की खबर का खंडन करके यह तो बता ही दिया है कि मसूद जैसे आतंकियों से उसका चोली दामन का रिश्ता है। फिर आखिर पाकिस्तान की बात पर यकीन क्यों किया जाना चाहिए। उसने तो हमारे बहादुर सैनिकों द्वारा किये गए सर्जिकल स्ट्राइक को भी मानने से इनकार कर दिया था। तभी तो सेना को उस सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो जारी करना पड़ा जो कि आम तौर पर सेना के काम करने के तरीके से अलग था। पाकिस्तान तो यह नहीं बता रहा है कि एफ-16 के गिरने से कोई मरा या नहीं। वह तो एफ-16 के मार गिराये जाने की भी बात नहीं मान रहा है। पाकिस्तान का इनकार ही शेष दुनिया के लिए स्वीकार है, क्योंकि जब 1971 में पाकिस्तान के नब्बे हजार सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था, तब भी वहां के नेता जम्हूरियत में पाकिस्तान के जीतने के संदेश दे रहे थे। अब मसूद अजहर की मौत को भी नहीं मान रहे हैं। पाकिस्तान ने कब माना है कि दाऊद इब्राहिम उनकी सरजमीं पर पनाह पाता है। ओसामा बिन लादेन को भी नहीं माना था।